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पश्चिम मध्य रेलवे

         रेल मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दिनांक 4 जुलाई 2002 को औपचारिक रूप से इस रेलवे की गठन की अधिसूचना जारी करने के साथ पश्चिम मध्य रेलवे, एक नए क्षेत्रीय रेलवे के रूप में अस्तित्व में आया । इस नए क्षेत्रीय रेलवे का मुख्यालय जबलपुर में स्थित है । पश्चिम मध्य रेलवे को मध्य रेल के जबलपुर एवं भोपाल मंडल तथा पश्चिम रेलवे के कोटा मंडल को मिलाकर गठित किया गया है ।

भारतीय रेलवे के मानचित्र पर प.म.रे. का भैगोलिक विस्तार :-

जबलपुर मंडल :
        इटारसी (छोडकर) मानिकपुर ( छोडकर) दोहरी लाईन, गैरविद्युत बडी लाइन सेक्शन, बीना (छोडकर) कटनी दोहरी लाईन विद्युतीकृत बडी लाईन सेक्शन, कटनी सिगरौली (छोडकर) एकल लाईन गैर विद्युतीकृत बडी लाईन सेक्शन, और सतना रीवा एकल लाईन गैर विद्युतीकृत बडी लाईन सेक्शन,      
भोपाल मंडल :
        खडंवा (छोडकर) इटारसी दोहरी विद्युतीकृत बडी लाईन सेक्शन, इटारसी बीना दोहरी लाईन विद्युतीकृत बडी लाईन सेक्शन, बीना रूठियाई एकल विद्युतीकृत बडी लाईन सेक्शन, गुना ग्वालियर (छोड़कर) एकल और गैर विद्युतिकृत बडी लाईन सेक्शन, रूठियाई मक्सी (छोडकर) एकल गैर विद्युतीकृत बडी लाईन सेक्शन,    
कोटा मंडल :
        नागदा (छोडकर) मथुरा (छोडकर) दोहरी विद्युतिकृत बडी लाईन सेक्शन, कोटा-रूठियाई (छोड़कर) एकल विद्युतिकृत बडी लाईन सेक्शन, कोटा-चंदेरिया एकल गैर विद्युतीकृत बडी लाईन सेक्शन, पश्चिम दिशा में मुबई-हावड़ा मार्ग वाया इटारसी-जबलपुर तथा दिल्ली-मुम्बई मार्ग पर मथुरा (छोडकर)  से नागदा (छोडकर)  वाया रतलाम का मार्ग भारतीय रेलवे के स्वर्णिम चर्तुभुज का एक महत्वपुर्ण भुजा एवं विकर्ण बनाता है।
        उत्तर दक्षिण दिशा में इस क्षेत्रीय रेल में बीना (सहित) भोपाल-इटारसी (दिल्ली-चेन्नई मुख्य मार्ग के सेक्शन सहित ) इसके अलावा यह क्षेत्रीय रेल पश्चिम मघ्य रेलवे के क्षेत्राधिकार में नई कटनी आन लाईन तथा कटनी-सिंगरौली, सतना-रीवा झुकेही-कैमोर, बीना-गुना-कोटा, कोटा चदेरिया (छोडकर)  तथा मक्सी (गुना-कोटा, कोटा जैसे महत्वपुर्ण फ्रेट कारीडोर के अलावा यह रेलवे 39 जिलों को सेवा प्रदान करती है (म.प्र. के 24, राजस्थान के 13 तथा उ. प्र. के 2) इस रेलवे के अंर्तगत 2997 मार्ग कि. मी. है (6295 कि. मी. ट्रेक कि. मी. ) जिसमें से 1627 मार्ग कि. मी. विद्युतीकृत है। ( विद्युतीकृत ट्रेक कि. मी.  3972 कि. मी.) पमरे के कुल मार्ग कि. मी. में से 2185 कि. मी. (लगभग 73 प्रति पश्चिम दिशा में मुबई-हावड़ा मार्ग वाया इटारसी-जबलपुर तथा दिल्ली-मुम्बई मार्ग पर मथुरा (छोड़कर)  से नागदा (छोड़कर)  वाया रतलाम का मार्ग भारतीय रेलवे के स्वर्णिम चर्तुभुज का एक महत्वपुर्ण भुजा एवं विकर्ण बनाता है।
        इस रेलवे व्दारा सेवित महत्वपुर्ण स्टेशनों में जबलपुर, भोपाल एवं कोटा जो ए वन श्रेणी के स्टेशन हैं, हबीबगंज, इटारसी, बीना, विदिषा, होशगाबाद, कटनी, सतना, सागर, मैहर, पिपरिया, दमोह, सवाईमाधोपुर, भरतपुर जो ए श्रेणी के स्टेशन हैं, गंजबासौदा, हरदा, गुना, नरसिंगपुर, मदनमहल, गंगापुरसिटी, रामगंजमंडी, जो बी श्रेणी के स्टेशन है तथा बाएं, छाऊ महला, श्री महावीरजी जो आदि हैं जो डी श्रेणी के स्टेशन हैं।
        यातायात में पश्चिम मध्य रेलवे में यथाचित संतुलन है । मालभाड़़ा यातायात में महत्वपुर्ण प्रारंभिक यातायात सीमेन्ट का है जिसका लदान जबलपुर मंडल के सतना, रीवा क्लस्टर तथा कोटा मंडल के लखेरी, ढाड़ देवी, मोटक स्टेशनों से होता है। अन्य आरंभिक वस्तुंए जिनका लदान होता हैं, जबलपुर मंडल में बाक्साइड, लाइमस्टोन ,डोलोमाइट तथा क्लींकर, भोपाल मंडल पर एल पी जी एवं पी ओ एल तथा कोटा एवं भोपाल मंडलों पर खाद जबलपुर एवं भोपाल मंडलों से डीआयल्ड केक, तथा भेपाल मंडल से खाद्दयान का लदान किया जाता है।  वित्तीय वर्ष 2016-17 में इस रेलवे में 1585 वैगनों के लदान का दैनिक औसत है। वार्षिक प्रारंभिक राजस्व लदान लगभग 36.45 मी. टन का है (जो रू में लगभग 3253.22 करोड़ है) । यह रेलवे यात्री यातायात हेतु 605 मेल एक्सप्रेस, 143 यात्री गाड़ियॉं, जिसमें 9+2 जोड़ी राजधानी/शताब्दी गाड़ियॉं, 2 जोड़ी जन शताब्दी गाड़ियां, 5 जोड़ी गरीब रथ, 8 जोड़ी दुरन्तो एक्स. तथा 2 जोड़ी सुविधा एक्स. वित्तीय वर्ष 2016-17 में इस रेलवे से 134.36 मिलीयन यात्रियों ने अपनी यात्रा आरंभ की जिससे लगभग 1505 करोड़ (वर्ष 2016-17) रूपये की यात्री आय अर्जन हुई । पार्सल के 128 करोड़ रूपये सहित अन्य अर्जन को लेखा में शामिल करने के पश्चात लेखा वर्ष 2016-17 में इस रेलवे का कुल अर्जन लगभग रू़ 5032 करोड़ है । वर्ष 2016-17 हेतु पमरे का परिचालिक अनुपात 64.35 प्रतिशत का है।
        पमरे के पास (नई कटनी जं. एवं इटारसी के रूप में ) साथ ही तीन विद्युत लोको शेड हैं - नई कटनी जं. (188 लोकोमोटिव की होल्डिंग), इटारसी (189 लोकोमोटिव की होल्डिंग) एवं तुगलकाबाद (227 लोकोमोटिव की होल्डिंग) जो कि कुल 604 विद्युत लोकोमोटिव का बेड़ा है (जन. 2017 तक) तथा दो डीजल लोको शेड भी है जो नई कटनी (229 लोकोमोटिव की होल्डिंग) तथा इटारसी (170 लोको की होल्डिंग) के साथ 399 डीजल लोकोमोटिव का बेड़ा है जो यातायात को चलायमान रखता है। कुल मिलाकर 1003 लोकोमोटिव को अच्छी स्थिति में रखना एक बड़ा कार्य है और इस रेल ने इस चुनौती को भली-भॉंति निभाया है। 
        इसके अलावा भोपाल में एक कोच पुर्ननिर्माण कारखाना है तथा कोटा में एक वैगन मरम्मत कारखाना है जो यात्री कोचों के भारी मरम्मत करते है तथा माल वैगनों विशेषकर तेल टैंक वैगनों की पी ओ एच  की जाती है । भोपाल के कोच पुर्ननिर्माण कारखाना ने महामना एक्सप्रेस (22 जनवरी 2016 को उदघाटित) में यात्री सुविधाएं/आराम तथा स्टेट-ऑफ-आर्ट फीचरों से लैस माडल रैक का नवीनीकरण किया गया है । पश्चिम मध्य रेलवे ने यातायात में संरक्षा को प्राथमिकता देते हुए, पहला क्षेत्रीय रेलवे है जिसने मानवरहित रेल समपार को 31 अगस्त 2015 को पूर्ण रुप से समाप्त कर दिया है ।
पमरे पर चालू कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाएं :-
       इटारसी-मानिकपुर सेक्शन (510 किमी) पर विद्युतीकरण कार्य, ललितपुर-खजुराहो-पन्ना-सतना सेक्शन (283 किमी), रीवा-सिंगरौली सेक्शन (165 किमी) तथा रामगंजमंडी-भोपाल सेक्शन (262 किमी) पर नई लाइनें, कटनी-सिंगरौली सेक्शन (261 किमी), बीना-कोटा सेक्शन (282 किमी) तथा सतना-रीवा सेक्शन (50 किमी) का दोहरीकरण तथा बीना-हबीबगंज-बरखेड़ा-बूंदी-इटारसी सेक्शन (कुल 242 किमी) का तिहरीकरण । भोपाल मंडल के विदिश में वर्ष 2015 मे डीजल लोकोमेटिव ट्रेक्सन आल्टरनेटर वर्कशॉप की आधारशिला रखी गई । यहॉं पर डीजल लोकोमेटिव में उपयोग किए जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण घटकों का निर्माण किया जाएगा ।
इस रेल पर कुल अधिकारियों एवं कर्मचारियों की संख्या 56022 (जनवरी 2017 में ऑन रोल) है, जो रेल के निरंतर परिचालन को सुनिष्चित करते है । ये रेल कर्मी महाकौल, मालवा एवं बुंदेलखंड के लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए कर्मठता एवं समर्पण के साथ दिन-रात कार्य में लगे रहते है ।
        यदि आप वन प्रेमी हैं, तो पमरे आपको कान्हा-किसली, बांधवगढ़, रणथम्भौर एवं शिवपुर के राष्ट्रीय आरक्षित वन तथा भरतपुर का पक्षी अभ्यारण का सैर करवाने का वादा करता है । यदि आप पहाड़ों के प्राकृतिक दृश्य का आनंद लेना चाहते हैं, तो पचमढ़ी पधारें । यदि आप ऐतिहासिक स्मारकों में रुचि रखते हैं, तो खजुराहो, सॉंची एवं भीमबेटका की यात्रा करें । यदि आप धार्मिक स्थलों की यात्रा करना चाहते है, मैहर का मॉं शारदा देवी मंदिर, श्रीधाम का राजराजेश्वरी मंदिर, बॉंदकपुर के निकट स्थित महादेव मंदिर, श्रीमहावीरजी के जैन मंदिर तथा भोपाल अथवा नागदा में स्थित बिरला मंदिर पधारें । अवकाश पर्यटन हेतु आप जबलपुर के नजदीक संगमरमरी चट्टानों से होकर गुजरने वाली नर्मदा नदी में नौका विहार कर सकते है अथवा कोटा तथा बूंदी किला की यात्रा करें । हमारे स्टेशनों को सौन्दर्यपरक बनाने हेतु स्थानीय चित्रकारों के दल द्वारा कोटा मंडल के सवाई माधोपुर एवं स्टेशनों की दीवारों, स्तंभों एवं छतों पर उस क्षेत्र में पाए जाने वाले विभिन्न वनस्पतियों एवं प्राणियों को बड़ी सुन्दरतापूर्वक चित्रित किया गया है । इस रेलवे के हबीबगंज एवं सवाई माधोपुर स्टेशनों को क्रमश वर्ष 2015 एवं 2016 में भारतीय रेल के सर्वाधिक पर्यटक अनुकूल स्टेशन ट्रॅाफी से सम्मानित किया गया ।
        पमरे के अधिकारी एवं कर्मचारी अपने समर्पित प्रयास एवं सामूहिक सहयोग से लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने दृढ़ संकल्पित है तथा आधुनिकीकरण एवं किफायत के द्वारा इस रेलवे को उत्कृष्टता की ओर ले जाने के लिए कटिबध्द है ।




Source : पश्चिम मध्य रेल CMS Team Last Reviewed on: 11-03-2020  


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